अंधेरे में टकराना क्षम्य है। मगर उजाले में टकराना अपराध है। जब तक ज्ञात नहीं था, हम भी जयकारे लगाते थे। मगर अब सिर्फ जोहार। यद्यपि राम-राम सा बोलने में कोई परहेज नहीं, क्योंकि जेहनी जहरखुरानी के शिकारियों की भी पहचान होती जा रही है।-आ. ताऊ।-29.12.2019
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