दूसरों के बनाये रास्तों से मंजिल मिलना सम्भव हुआ होता तो हम से पहले उनको ही मंजिल मिल चुकी होती। यदि हमें अपना लक्ष्य हासिल करना है तो समयानुकूल सही और सुगम रास्ते भी हमें ही बनाने होंगे।
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Sunday, 29 December 2019
Thursday, 26 December 2019
डस्टबिन की शोभा बढाने वाली विचारधारा की मंजिल किधर है?
डस्टबिन दफ्तर में रहती है, लेकिन डस्टबिन का कचरा किधर जाता है? डस्टबिन की शोभा बढाने वाली विचारधारा के अंधभक्त समझें उनके विचारों की मंजिल किधर है?-25.12.2019
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वर्तमान परिदृश्य में आदिवासी मीणा समुदाय की दशा और दिशा
वर्तमान परिदृश्य में आदिवासी मीणा समुदाय की दशा और दिशा हम हर दिन कुछ न कुछ सीखते और बदलते रहते हैं। सबसे पहले ...
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मुझ जैसे अराजनीतिक व्यक्ति को निपटाने हेतु जिसके द्वारा 2014 से लगातार घटिया षड्यंत्र किये जा रहे हैं। वह राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के विर...
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क्या MOST के Rt. भ्रष्ट ऑफीसर MOST का भला कर सकते हैं? देशभर में कोई एक भी उदाहरण हो तो जनता के सामने लाया जाना जरूरी है।-24.12.2019
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वर्ष 2020 के लिये मेरी दिली कामना है कि MOST/वंचित समुदाय सकारात्मक रूप से इस तरह से एकजुट और सशक्त हो जाये कि उसके हकों को छीनने से पहले ...