MOST/वंचितों में सर्वस्वीकार्य एक ही समानता है-
"हम सब संवैधानिक हकों से वंचित हैं।"
क्या यह समानता एकता के लिये पर्याप्त नहीं है? जो शूद्रत्व और DNA जैसी मनगढ़ंत कहानियां गढ़ी जा रही हैं।
आदिवासी ताऊ, 29.12.2019
वर्तमान परिदृश्य में आदिवासी मीणा समुदाय की दशा और दिशा हम हर दिन कुछ न कुछ सीखते और बदलते रहते हैं। सबसे पहले ...