हम सीखते कम और नकल अधिक करते हैं। जिनकी नकल करते हैं, उन्होंने भी किसी की नकल की हुई होती है। हमें मौलिकता को समझने की समझ पैदा करनी होगी। अन्यथा 70 साल से जारी भेड़चाल के साथ मनगढ़ंत शूद्रत्व के अंधकूप में गिरेंगे और मरेंगे।
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वर्तमान परिदृश्य में आदिवासी मीणा समुदाय की दशा और दिशा
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